मंगलवार, 26 मई 2009

परी है तू

परियों की कहानी
सुनते थे
परियों के सपने
बुनते थे
तू ख्याल मेरा
तू मेरी सहर
तू मेरा तसव्वुर
परी है तू
चाँद फलक का
तेरा बसेरा
ताबीर है तू
मेरे ख्वाबों की
गुलशन की महक
रंगों की चमक
एक तेरे बिना
सब गायब थी
मेरा तन महका
मेरा मन महका
तेरे आने से
उपवन महका
गर ख्वाब है तू
मै सो जाऊ
तेरे सपनों मे
बस खो जाऊ।

...........................

11 टिप्‍पणियां:

maandarpan ने कहा…

बहुत ही प्यारी रचना

रंजना ने कहा…

Waah ! waah ! Waah !

Komal bhavon ko bahut hi sundar abhivyakti di hai..Waah !

SWAPN ने कहा…

bahut cute, thodeshabdon men manmohak rachna. nirjhar bhai, bilkul jharne si . wah badhai.

"लोकेन्द्र" ने कहा…

वाह वाह........
सुन्दर रचना...........

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

बिलकुल परी जैसी सुंदर रचना बन गयी है आपकी।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

hempandey ने कहा…

कविता के माध्यम से परी धरती पर उतर आयी है.

Jayant Chaudhary ने कहा…

"गर ख्वाब है तू.. मैं सो जाऊं.."

क्या बात है भाई साहेब.
आनंद आ गया..
मैं भी सपनों में,
खो गया, सब मिल गया!!

~जयंत

Priya ने कहा…

bahut sunder ! khwab khoobsurat hain

विनय ने कहा…

बहुत रूमानी रचना

shama ने कहा…

Kya aapki rachnayen kabhi 'sur baddh' huee hain?
Inhen geeton ke roopme itni khoob sooratee se gaya jaa sakta hai..!

Mere chitr kisee na kisi karanwash badalte rahe...kshama chahtee hun,gar asamansaj hua ho to..

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prritiy---------sneh ने कहा…

waah badi khoobsurat pari hai....

Neerjhar ji aapki tippani par mai kya kahun.....atishiyokti ho jayegi.

Shubhkamnayen