सोमवार, 22 मार्च 2010

ख्वाब और ख्याल

रात मैंने
एक ख्वाब को आवाज दी
ख्वाब के दस्तक देने से पहले
एक खूबसूरत ख्याल आया
और मुझे जगाकर
अपने साथ ले गया
चांदनी रात में
ख्वाब ने
सुबह तक इंतजार किया

क्या करें ?
ख्याल खूबसूरत हो तो
वक़्त का पता ही नहीं चलता
सहर हो गयी
ना ख्वाब रहा
ना ख्याल रहा
आँखें बोझिल है
आज दिन में भी
धुंध रहेगी 

......................

19 टिप्‍पणियां:

Amitraghat ने कहा…

कोई बात नहीं. आज फिर से दोनों दस्तक देंगे...बहुत सुन्दर लिखा......"
amitraghat.blogspot.com

राज भाटिय़ा ने कहा…

एक बहुत सुंदर रचना जी धन्यवाद

रंजना ने कहा…

वाह...बहुत सुन्दर !!!

बहुत दिनों बाद लिखा ??? इतना अंतराल भी ठीक नहीं....

sangeeta swarup ने कहा…

खूबसूरत ख्याल ऐसे ही होते हैं...बहुत अच्छी रचना...

kshama ने कहा…

रात मैंने
एक ख्वाब को आवाज दी
ख्वाब के दस्तक देने से पहले
एक खूबसूरत ख्याल आया
और मुझे जगाकर
अपने साथ ले गया
Ye khayal hi kitna khoobsoorat hai..

बेचैन आत्मा ने कहा…

ख्वाबों-खयालों की दुनियाँ निराली है
आपने आवाज दी यही बड़ी बात है

..यह वाकया तो मेरे साथ भी होता है
अभिव्यक्ति आपने दी.....बधाई।

anjana ने कहा…

बहुत अच्छी रचना है ।बधाई...

आशीष/ ASHISH ने कहा…

Mujhe bhi yeh bimaari hai, aap khud ko akela na samjhein!
Bahut umda rachna!
Khaskar aakhiri panktiyaan....
Aankhen bojhil hain...
Aaj din mein bhi dhundh rahegi!
Saadhuwaad!

नवीन त्यागी ने कहा…

सपना हो या हकीकत अगर खूबसूरत है तो वास्तव में समय का पता ही नहीं चलता.
किन्तु जैसे सपने टूटने की कोई आवाज नहीं होती अगर हकीकत rooth jaye तो तो bahut आवाज होती है.

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने उम्दा रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

ज्योति सिंह ने कहा…

behtrin rachna ,dil ko sparsh karti hui .

Manish Kumar ने कहा…

hwabon khyalon ko badi sundarta se apni panktiyon mein badha hai aapne...

सुमन'मीत' ने कहा…

आपके ख्यालात की ख्वाबगाह अच्छी लगी
मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया

बेनामी ने कहा…

aise lga kisi tv channel pe news lagi ho...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ख्वाब तो बेवफा होते हैं ... साथ छोड़ जाते हैं ... अच्छी रचना .....

लता 'हया' ने कहा…

शुक्रिया ,दाद क़ुबूल की लेकिन आप नया ख्वाब कब देखेंगे ..दाद देने लायक़ ?

kshama ने कहा…

Kaafi dinon se aapne likha nahi?

rohitler ने कहा…

शानदार रचना
इसको पढ़कर एक शेर याद आ गया

ख़्वाब था या ख़्याल था क्या था
हिज्र था या विसाल था क्या था

Maria Mcclain ने कहा…

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