मंगलवार, 27 जनवरी 2009

हादसा एक नया आज...

हादसा आज फ़िर से नया हो गया !
ख्वाब जगते रहे और में सो गया !!

जो ज़माने की ठोकर में बरसों रहा !
आज पत्थर वो देखो खुदा हो गया !!

ढूँढा था दिल ने जिसे दर - - दर !

रूबरू वो हुआ तो ये दिल खो गया !!

जिसने बेखुद किया था मुझे एक दिन !

क्यूँ? अजनबी आज वो बेसबब हो गया !!

कुछ तो है इस मौहब्बत में जादूगरी !
नाम आते ही उसका नशा हो गया !!

परत - दर - परत भेद सब खुल गए !
आँख पुरनम हुई जिस्म बुत हो गया !!

5 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

बहुत सुन्दर मनोभाव

---आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

अंतिम से पहला शेर बहुत बढ़िया है... बधाई.. नीर जी........

श्रद्धा जैन ने कहा…

Naaam aate hi uska nasha ho gaya
bhaut achha laga

Harsh pandey ने कहा…

achchi kavita hai bhav ghahare hai aapke

रंजना ने कहा…

वाह ! वाह ! वाह !

बहुत बहुत सुंदर.....हरेक शेर लाजवाब,खूबसूरत और दिल को छूने वाली.
शाबाश !