मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

आईने में ज़िन्दगी

भीख मांग रहा है फिल्म ‘मदर इंडिया’ का जमींदार ......
उसकी आवाज़ बहुत हल्की है
उसकी बातों में बहुत तल्खी है
वो भी तारा था चमकता नभ का 
बात सच है ये मगर कल की है  
धूल चेहरे पे ज़मी है अब तक 
उसकी आँखों में नमी है अब तक
उसने रिश्तों को जिया है शायद
उसने विष पान किया है शायद
उसमें ज़ज्बात अभी बाकी है
ज़ीस्त की आस अभी बाकी है
वो भी तकदीर का मारा होगा 
वो भी इस वक़्त से हारा होगा !!

.......................................

26 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

वक़्त वक़्त का खेल और दर्द ....

रचना दीक्षित ने कहा…

ज़ीस्त की आस अभी बाकी है
उसने रिश्तों को जिया है शायद
उसने विष पान किया है शायद
वो भी इस वक़्त का मारा होगा
वो भी भगवान् का प्यारा होगा !!

वक्त से कौन जीता है. बहुत सुंदर और संवेदनशील रचना.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह बहुत उपयोगी प्रस्तुति!
अब शायद 3-4 दिन किसी भी ब्लॉग पर आना न हो पाये!
उत्तराखण्ड सरकार में दायित्व पाने के लिए भाग-दौड़ में लगा हूँ!
बृहस्पतिवार-शुक्रवार को दिल्ली में ही रहूँगा!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ओह ...मार्मिक

M VERMA ने कहा…

ज़ीस्त की आस अभी बाकी है
बहुत सुन्दर और भावयुक्त रचना

expression ने कहा…

काश ये आस कभी टूटे ना....जब तक सांस है, कम से कम तब तक.....

बहुत सुन्दर..

अनु

संजय भास्कर ने कहा…

पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

सटीक और सही संदेश देती अद्भुत अभिव्यक्ति.
....... रचना के लिए बधाई स्वीकार....!!!!

prritiy---------sneh ने कहा…

kya baat hai, bahut sunder abhivyakti

shubhkamnayen

kshama ने कहा…

ज़ीस्त की आस अभी बाकी है
उसने रिश्तों को जिया है शायद
उसने विष पान किया है शायद
वो भी इस वक़्त का मारा होगा
वो भी भगवान् का प्यारा होगा !!
Wah!

Kavita Rawat ने कहा…

marmsparshi rachna!

रचना दीक्षित ने कहा…

अब क्या कहें??? बेहद मर्मस्पर्शी

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 10/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जब तक अंकों में धूप रहेगी ... चमक के साथ नमी भी रहेगी ... मर्म्स्पर्शीय ...

Saras ने कहा…

वक़्त किसीका सगा नहीं होता .....बस अपनी रफ़्तार से चलता है ...जो छूट जाता है .....उसका हश्र कुछ इससे जुदा नहीं होता .....बहुत ही मार्मिक सच्चाई !

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

आवाज़ बहुत हल्की है
उसकी बातों में बहुत तल्खी है waah........bahut accha.

Khare A ने कहा…

wah! bahut hi khoob!

सतीश सक्सेना ने कहा…

यह कहाँ हैं ??
हमें इनकी मदद करनी चाहिए,
कृपया पता दें .....
satish1954@gmail.com

S.N SHUKLA ने कहा…

bahut sundar, badhai.

ZEAL ने कहा…

Excellent creation !

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

सुन्दर.... भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

निरामिष ने कहा…

बहुत ही मार्मिक!!
जीवन के कैसे दांव?
कभी धूप कभी छांव!!

Shanti Garg ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना....
मेरे ब्लॉग

विचार बोध
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

विरेन्द्र ने कहा…

Bahut khoobn!

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

एहसास ने कहा…

Nirjhar ji....itni sundar kavita or itni bhavpurnn....kaye baar padhi par har baar pehle se jyada dil me utari.....shabd nahi tarif k.....behad sashakt kavita...

Ehsaas....

prritiy----sneh ने कहा…

sunder rachna

yahi sach hai is jahan ka aaj koi upar kal neeche....

bahut achhe se is sach ko kalambadhdh kiya hai

shubhkamnayen