शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

राह्-ए-मौहब्बत ~~

कठिन बहुत है प्यार की राहें
तुम ना जाना इन राहों में
जोगी बन के आज भी मजँनू
घूम रहे हैं इन राहों में !

टूटे ख्वाबों के कुछ टुकड़े
बिखरे होंगे इन राहों में
हसरत होंगी पाँव के नीचे
और छाले भी इन राहों में !

पार नदी के खड़ी हुई हैं
कितनी सोहणी इन राहों में
कितने राझें ढूढं रहे हैं
अपनी हीरे इन राहों में !

भूख लगेगी जब-जब पथ में
ठोकर खाना इन राहों में
प्यास तुम्हें जब व्याकुल कर दे
आसूँ पीना इन राहों में !

पहाड़ काटकर नहर बनाते
कितने खुदकश इन राहों में
आग का दरिया इश्क नाम है
कितने डूबे इन राहों में !!

5 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

मिलन कहीं गर हो जाए तो।
रात कटेगी उन बाँहों में।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

mehek ने कहा…

भूख लगेगी जब-जब पथ में
ठोकर खाना इन राहों में
प्यास तुम्हें जब व्याकुल कर दे
आसूँ पीना इन राहों में !
bahut achha laga ye nagma,dil ko chu gaya.badhai.

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

बहुत अच्छी रचना है आपकी । भाव की प्रखर अिभव्यिक्त है । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख- उदूॆ की जमीन से फूटी िहंदी गजल की काव्यधारा- िलखा हैं । समय हो तो पढें और प्रितकिर्या भी दें -

http://www.ashokvichar.blogspot.com

रंजना ने कहा…

भूख लगेगी जब-जब पथ में
ठोकर खाना इन राहों में
प्यास तुम्हें जब व्याकुल कर दे
आसूँ पीना इन राहों में !

वाह ! बहुत ही सुंदर भावपूर्ण रचना प्रशंशनीय है..
ऐसे ही लिखते रहो.शुभकामनाएं.

shama ने कहा…

Mai iswaqt kewal tippanee dene to nahee aayi hun...han diye binaa rehbhi nahee paa rahi...Shamal Suman jine jo panktiyan chunee hain, shayad mujhebhi behtareen lageen, par tay kar paana mushkil hai..mai aapko maine pichhale kuchh dinoke haalaat maadde nazar rakhte hue, lekh likhe hain...vinatee hai...aap zaroor padhen. Ek koshish hai chhotisi, apne deshke prati apni zimmedaari nibhaneki..