गुरुवार, 19 मार्च 2009

नि:शब्द और खामोश

श्याह काली रातों में
कुछ अहसासों के रेले
ख्वाहिशों की गठरी लेकर
मेरे पास आते हैं !

एक-एक कर सारे अहसास
अपनी ख्वाहिशों की गठरी
मेरे आगे खोलकर
मुझसे मांगते हैं !

उन सारे अनछुए लफ्जों को
जो मैंने कभी चुने थे
ख्वाहिशों के साथ मिलकर
सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारे लिए !

अब ना वो ख्वाहिशें है
ना वो सारे अनछुए लफ्ज़
बस ये खामोशी है और
कुछ बिखरी यादें !

लफ्जों को न पाकर
उदासी और मायूसी के साथ
एक-एक कर सारे अहसास
वापस लौट जाते है !

मैं हमेशा की तरह
बस देखता रह जाता हूँ
इस श्याह काली रात की तरह
नि:शब्द और खामोश !!
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10 टिप्‍पणियां:

नीरज गोस्वामी ने कहा…

जितने सुन्दर भाव उतने ही सुन्दर शब्द...बहुत अच्छी रचना...
नीरज

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

पर क्या सच में खामोश रह पातें हैं ..बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने भाव बहुत गहरे लगे इस के ..

अनिल कान्त : ने कहा…

अब ना वो ख्वाहिशें है और ना वो सरे अनछुए लफ्ज़ ....आपने दिल की बात को बहुत खूबसूरती से कहा है


मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Udan Tashtari ने कहा…

गुलजार की रचनाओं सी महक है, बहुत सुन्दर!!

रंजना ने कहा…

वाह !! वाह !! वाह !!

गहन भावों की अतिसुन्दर अभिव्यक्ति....
अकेलेपन की उदासी और पीडा को शब्दों में जीवंत और मूर्त कर ढाल दिया तुमने...वाह.

Harkirat Haqeer ने कहा…

Nirjar ji.

Bhot sundar abhivyakti...!!

अब ना वो ख्वाहिशें है और ना वो सरे अनछुए लफ्ज़ .... jaise sabdon me pida jivant ho uthi hai....bhot khoob...!!

MUFLIS ने कहा…

"ek-ek kar sare ehsaas
apni khwahishoN ki gathree
mere aage khol kar
mujhse maangte haiN..."

qreeb-qreeb hr ik ke mn ki baat keh di aapne apni iss khoobsurat rachna meiN...
khaamoshi bhi kabhi-kabhi jee bhar ke swaal karti hai..

bahut achhi nazm hai...badhaaee.
---MUFLIS---

M.A.Sharma "सेहर" ने कहा…

लफ्ज़ों को न पाकर
ऊदासी और मायूसी के साथ
एक एक कर सारे अहसास
वापस लौट जाते हैं

बहुत खूब निर्झर जी
सुन्दर ,संवेदनशील,भावपूर्ण !!

hem pandey ने कहा…

सुन्दर शब्दों से सजी, सुन्दर ढंग से व्यक्त भावाभिव्यक्ति के लिए साधुवाद.

Mohsin ने कहा…

subhanallah, subhanallah