गुरुवार, 26 मार्च 2015

"जरुरी है"

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अँधेरे गर ना होंगे तो
ये जुग्नू भी नहीं होंगे
उजाले भी जरुरी है 
अँधेरे भी जरूरी है।

अगर ये दिन जरूरी है
तो रजनी भी जरूरी है
ये चंदा भी जरुरी है
ये तारे भी जरूरी है।

सरिता भी जरूरी है 
ये सागर भी जरूरी है
अगर जीवन जरूरी है 
तो ये जल भी जरुरी है।

ये किस्तें भी जरुरी है  
ये रिश्ते भी जरुरी है
कहीं पर तुम जरुरी हो 
कहीं पर हम जरुरी है।।  



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3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

नवरात्रों की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (27-03-2015) को "जीवन अगर सवाल है, मिलता यहीं जवाब" {चर्चा - 1930} पर भी होगी!
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

स्वाति ने कहा…

very nice.......

रचना दीक्षित ने कहा…

कहीं पर तुम जरुरी हो
कहीं पर हम जरुरी है।।
सच ही कहा आपने सब कुछ ही तो जरुरी है