मंगलवार, 21 अक्तूबर 2008

ये इश्क ले आया मुझे ..

जिन आँखों ने तेरे सिवा सपना कोई देखा नही !
तुने उन आँखों से रिसते खूँ को भी देखा नही !!

बेखुदी मेरी कहो या बेसहूरी नाम दो !
मैंने अपने आप को तुझसे ज़ुदा देखा नही !!

एक नज़र ए-बेखबर तू डाल इस फ़कीर पे !
चार-सू नज़रें तेरी बस एक मुझे देखा नही !!

तुने आसमां से टूटते तारों को देखा रोज़ शब !
एक मेरे दिल का टूटना तुने कभी देखा नही !!

ये इश्क ले आया मुझे उस अर्श से इस फर्श पे !
कुछ लोग कहते है दीवाना नीर सा देखा नही !!

6 टिप्‍पणियां:

रंजना ने कहा…

ये इश्क ले आया मुझे उस अर्श से इस फर्श पे !
कुछ लोग कहते है दीवाना नीर सा देखा नही !!


वाह ! बहुत खूबसूरत लिखा है.

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

तुने आसमां से टूटते तारों को देखा रोज़ शब !
एक मेरे दिल का टूटना तुने कभी देखा नही !!

बहुत खूब कहा

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

तुने आसमां से टूटते तारों को देखा रोज़ शब !
एक मेरे दिल का टूटना तुने कभी देखा नही !!

ये इश्क ले आया मुझे उस अर्श से इस फर्श पे !
कुछ लोग कहते है दीवाना नीर सा देखा नही !!
बहुत खूबसूरत लिखा है.

कुश एक खूबसूरत ख्याल ने कहा…

bahut khoob.. bahut hi badhiya

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

तुने आसमां से टूटते तारों को देखा रोज़ शब !
एक मेरे दिल का टूटना तुने कभी देखा नही !!

बहूत ख़ूब...

venus kesari ने कहा…

बहुती अच्छे अशआर है


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