सबब थी जीने का जो भी
हर उस ख्वाहिश ने दम तोडा
खामोशी इस कदर छाई
की सब ख्वाबों ने घर छोड़ा ।
दर-ओ-दीवार जिस घर की
मुझे जाँ से भी प्यारी थी
फ़क़त इस पेट की खातिर
मैंने उस घर को भी छोड़ा ।
तलाश-ए-जीस्त में हमने
खाक छानी है सहरा की
मसर्रत छिन गई तब से
वतन जब से मैंने छोडा ।
वो पत्थर जिसको राहों से
हटाकर मैंने पूजा था
झुका सर जिसके सजदे में
उसी पत्थर ने सर फोड़ा ।
बची न अब कोई हसरत
समेटे हूँ मैं टुकड़ों को
बसाया जिसको इस दिल में
उसी दिलबर ने दिल तोडा ॥
......................................
ख्वाबों का कुंभ
2 महीने पहले
24 टिप्पणियां:
अच्छी रचना बधाई
shabd bahut kuchh bolte hain
बहुत कुछ कहती है आपकी रचना..
बहुत ही गहन भावुक अभिव्यक्ति....
पीडा शब्दों में ढल साकार हो गयी है...
रचना की प्रवाहमयता बेजोड़ है...
इस सुन्दर मर्मस्पर्शी रचना के लिए बधाई..
बची न अब कोई हसरत
समेटे हूँ मैं टुकड़ों को
बसाया जिसको इस दिल में
उसी दिलबर ने दिल तोडा ॥
BAHUT HI MRMSPARSHI..........AAPAKI LEKHAN ME SUNDAR BHAW OUR SHABD DONO HI DEKHANE KO MILE .........BADHAYI
वो पत्थर जिसको राहों से
हटाकर मैंने पूजा था
झुका सर जिसके सजदे में
उसी पत्थर ने सर फोड़ा ।
बहुत सुन्दर !
यकी था जिसपे
सुनेगा बात मेरी जो
उसी ने मुझे अनसुना
अनदेखा कर दिया
bahut gehre jazbaat,dil ko hu leti sunder rachana.
वो पत्थर जिसको राहों से
हटाकर मैंने पूजा था
झुका सर जिसके सजदे में
उसी पत्थर ने सर फोड़ा
bahut khoob nirjhar, umda rachna. badhaai.
तलाश-ए-जीस्त में हमने
खाक छानी है सहरा की
मसर्रत छिन गई तब से
वतन जब से मैंने छोडा ।"
बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति । धन्यवाद ।
बेहतरीन रचना.
खूबसूरत कविता..
बहुत सुंदर रचना, दर्द भरे शव्दो मै लिखी आप ने.
धन्यवाद
क्या भावात्मक रचना.. बहुत ही अच्छा लगा..
दिल टूटा है तो जुड़ भी जायेगा इत्मिनान रखिये
शीशे में मय,मय में नशा मै नशे में हूँ.
उल्फत मे गम गम में मजा मै मजे में हूँ.
'वो पत्थर जिसको राहों से
हटाकर मैंने पूजा था
झुका सर जिसके सजदे में
उसी पत्थर ने सर फोड़ा '
- बहुत खूब.
dard bah raha hai bilkul jharane ki tarah......sundar abhivyakti
बसाया जिसको इस दिल में
उसी दिलबर ने दिल तोडा ॥ अहा!
क्या ब्बात कही भाई वाह वाह। बहुत सुन्दर रचना। इतने दिन हमारी मुलाक़ात कैसे न हुई ?
दिल के जज्बों के सहारे इस जालिम जमाने की अच्छी तस्वीर उतारी है आपने।
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Kya mazboori hai!! wah!
बसाया जिसको इस दिल में
उसी दिलबर ने दिल तोडा
बहुत ही भावुक रचना
खूबसूरत अभिव्यक्ति
अच्छा लगा
धन्यवाद
आज की आवाज
तलाश-ए-जीस्त में हमने
खाक छानी है सहरा की
मसर्रत छिन गई तब से
वतन जब से मैंने छोडा ।
BAHUT SUNDER
bhai saahab hum to aap ki rachnawo ke mureed ho gaye
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