बुधवार, 6 जनवरी 2021

कैसा हूँ में ?

३-४ साल बाद फिर एक बार भावों का ज्वार कुछ
शब्द बहा के लाया है देखते हैं आपको कैसे लगे ?


निर्झर था फिर नदी हुआ में। 
और अब सागर जैसा हूँ में।
बरसों बाद मिला वो बोला। 
कैसा था और कैसा हूँ में।।

तुम ही कहोगे मिलकर मुझसे।
बिलकुल तेरे जैसा हूँ में।
पढ़ते-पढ़ते खो मत जाना। 
पहली चिट्ठी जैसा हूँ में।।

जमी हुई है गर्द  समय की। 
वर्ना हीरे-मोती जैसा हूँ में। 
पीर 'नीर' की जानोगे तुम।  
चखकर देखो कैसा हूँ में।। 

   
 



 

6 टिप्‍पणियां:

कविता रावत ने कहा…

तुम ही कहोगे मिलकर मुझसे।
बिलकुल तेरे जैसा हूँ में।
पढ़ते-पढ़ते खो मत जाना।
पहली चिट्ठी जैसा हूँ में।।

..बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सार्थक सृजन।

Anamika ने कहा…

निर्झर और नीर एकदम विपरीत अर्थ किन्तु एक दूसरे के पूरक भी।

Smart Indian ने कहा…

बहुत बढ़िया!

Zee Talwara ने कहा…

निर्झर था फिर नदी हुआ में।
और अब सागर जैसा हूँ में।
बरसों बाद मिला वो बोला।
कैसा था और कैसा हूँ में।।
बहुत ही सुन्दर लिखा है ! धन्यवाद। Visit Our Blog

bsc 1st year result 2021 roll number wise ने कहा…

Really great article, Glad to read the article. It is very informative for us. Thanks for posting.